इस साल कम होगा सर्दी का सितम

पटना: अगर आपको जाड़े में कड़ाके की सर्दी से परेशानी और उलझन होती है तो आपके लिए एक बहुत ही अच्छी खबर है। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल साइंसेज के द्वारा जाड़े के मौसम के पूर्वानुमान पर किये गए अध्ययन के अनुसार इस बार कम सर्दी पड़ेगी।

सीयूएसबी के जन संपर्क अधिकारी  मो. मुदस्सिर आलम ने बताया कि विवि के पर्यावरण विभाग के विभागाअध्यक्ष डॉंं प्रधान पार्थ सारथि ने इस विषय पर अध्ययन करते हुए यह अहम जानकारी दी है। पीआरओ ने कहा कि डॉ सारथि अपने अध्ययन से इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं, कि इस वर्ष में गंगा के मैदानी (गैंगेटिक प्लेन) इलाकों जिसमें बिहार राज्य प्रमुखता से शामिल है जाड़े का मौसम पिछले वर्षों के मुकाबले थोड़ा गर्म होगा और कम सर्दी पड़ेगी।



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इस संबंध में ज्यादा जानकारी देते हुए सह-प्राध्यापक डॉ सारथि ने कहा की उन्होंने मौसम पूर्वानुमान के कई अंतरराष्ट्रीय मॉडलों पर अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है। उन्होंने कहा कि अपने प्रयोगशाला में उन्होंने एपेईसी क्लाइमेट सेंटर कोरिया एवं विश्वस्तर की दूसरी एजेंसियों के द्वारा अक्टूबर 2016 से फ़रवरी 2017 के बीच की अवधि  के प्राप्त डेटा का अध्ययन किया है। डेटा के आंकलन से यह अनुमान लगाया गया हैpps-cusb-patna0 कि भारत के धरातल का तापमान बढ़ गया है जिसके कारण जाड़े में तापमान इस अवधि में सामान्य से ज्यादा होगा।

डॉ सारथि ने कहा की जाड़े के मौसम में उत्तरी भारत जिसमे बिहार में स्थित गंगा के मैदानी छेत्र शामिल हैं मध्य (मीन) तापमान में 0.50 सेल्सियस से 0.70 सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इस बढ़े हुए तापमान का व्यापक असर मध्य भारत में भी पड़  सकता है। जबकि दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम भारत में इसका प्रभाव नहीं के बराबर होगा।

डॉ सारथि बिहार सरकार के पर्यावरण एवं मौसम संबंधी कई समितियों के सदस्य भी हैं। डॉ सारथि के अनुसार हिमालय और यूरेशियन छेत्रों में स्तिथ बर्फ के ढके पहाड़ों से बहने वाली उत्तरी – पूर्वी वायु भी जाड़े में तापमान को सामान्य से ज्यादा बढ़ा सकती है।

वहीं पश्चिमी छेत्रों से बहने वाली वायु से तापमान बढ़ सकता है और बारिश भी हो सकती है।