2जी स्कैम में विशेष कोर्ट का फैसला : ए. राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपी बरी

कनिमोई और ए राजा

नई दिल्ली : देश के सबसे बड़े घोटालों में शुमार 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. इस मामले में आज गुरुवार 21 दिसंबर को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाया है. अपने फैसले में कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय टेलिकॉम मंत्री ए. राजा और डीएमके राज्यसभा सांसद कनिमोई समेत कई हाई-प्रोफाइल आरोपियों को साफ़-साफ बरी कर दिया है. कोर्ट ने तीन मामलों की सुनवाई की है, जिसमें दो सीबीआई और एक प्रवर्तन निदेशालय (ED) का है.

कोर्ट द्वारा फैसला सुनाये जाने के बाद पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम, कनिमोझी समेत अन्य ने ख़ुशी जाहिर की है. चिदंबरम ने कहा है कि कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ यह एक बड़ी साजिश थी.



पहले सीबीआई केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा के अलावा डीएमके के राज्यसभा सांसद कनिमोई, पूर्व टेलीकॉम सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, ए. राजा के तत्कालीन निजी सचिव आरके चंदौलिया, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा, विनोद गोयनका, यूनिटेक कंपनी के एमडी संजय चंद्रा, कुशेगांव फ्रूटस एंड वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड के आसिफ बलवा व राजीव अग्रवाल, कलाईगनार टीवी के निदेशक शरद कुमार और सिनेयुग फिल्म्स के करीम मोरानी के अलावा रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी गौतम जोशी, सुरेंद्र पिपारा, हरि नैयर आरोपी हैं. इसके अलावा तीन कंपनियों स्वान टेलीकॉम लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिटेक वायरलेस (तमिलनाडू) को भी आरोपी बनाया गया था.

अक्टूबर 2011 में कोर्ट ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम से लेकर आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी, फर्जीवाडा, फर्जी कागजात बनाने, पद का दुरुपयोग, सरकारी दुराचरण आदि के आरोप तय किए थे. अप्रैल 2011 में दाखिल चार्जशीट में सीबीआई ने कहा था कि ‘2जी स्पेक्ट्रम से जुड़े 122 लाइसेंस गलत तरीके से आवंटित किए गए, जिससे सरकारी खजाने को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा.’ सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2012 में सभी लाइसेंस रद्द कर दिए थे.

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कोर्ट ने सीबीआई की ओर से 154 गवाहों के बयान दर्ज किए, जिनमें अनिल अंबानी, उनकी पत्नी टीना अंबानी और नीरा राडिया शामिल हैं. ये करीब 4400 पेज के हैं. इन मामलों में छह महीने से लेकर उम्रकैद की सजा तक का प्रावधान है. सीबीआई के दूसरे मामले में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि रुइया व अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान व उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के निदेशक विकास श्राफ शामिल हैं. चार्जशीट में लूप टेलीकॉम लिमिटेड, लूप इंडिया मोबाइल लिमिटेड और एस्सार टेली होल्डिंग लिमिटेड कंपनियां भी आरोपी हैं.