गांधीजी की हत्या के आरोप में नाथूराम गोडसे के साथ एक अन्य को भी पड़ी थी फांसी, जानें कौन है वह

लाइव सिटीज, पटना : अहिंसा के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आज के ही दिन शहीद हुए थे. उन्हें गोली मारी गई थी. कोर्ट में सुनवाई हुई और नाथूराम गोडसे को फांसी की सजा हुई. मैक्सिमम लोगों के जेहन में गांधीजी की हत्या के साथ ही गोली मारने वाले नाथूराम गोडसे की ही तस्वीर उभरती है. लेकिन हकीकत यह भी है कि नाथूराम गोडसे के अलावा एक और सजायाफ्ता को फांसी की सजा हुई थी.

दरअसल, महात्मा गांधी की हत्या में कुल नौ लोग आरोपी थे. सभी को कोर्ट में अभियुक्त बनाया गया था. इन नौ लोगों में से दो आरोपियों को फांसी की सजा हुई थी. इनमें एक नाथूराम गोडसे तो दूसरा नारायण आप्टे. आपको बता दें कि आप्टे हिन्दू महासभा का एक कार्यकर्ता था और उसको भी गोडसे की ही तरह अंबाला जेल में 15 नवंबर 1949 को फांसी दे दी गई थी. बाकी छह को उम्रकैद की सजा हुई थी, जबकि कोर्ट ने विनायक दामोदर सावरकर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. उम्रकैद की सजा पाने वाले लोगों में नाथूराम गोडसे का भाई गोपाल गोडसे भी शामिल था.



नारायण आप्टे का जन्म 1911 में एक संभ्रांत ब्राह्मण परिवार में हुआ था. बॉम्बे यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद तमाम तरह के काम किए. 1932 में उसने अहमदनगर में एक शिक्षक के तौर पर काम करना शुरू किया था. 1939 में आप्टे ने हिन्दू महासभा ज्वाइन की थी. 22 जुलाई 1944 को पंचगनी में उसने महात्मा गांधी के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व भी किया था.