कभी रहते थे किराये के मकान में, अब रहेंगे राष्ट्रपति भवन में

लाइव सिटीज डेस्क : देश के 14 वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जीवन इतना आसान नहीं था. राष्ट्रपति बनने तक का   सफ़र उनका बहुत कठिन रहा है. रामनाथ कोविंद का जन्म यूपी के कानपुर देहात की तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में हुआ था. उनको जानने वाले बताते हैं कि 1993 में कानपुर आये थे और कल्याणपुर इलाके के न्यू आजाद नगर में डॉ. आदित्य नारायण दीक्षित के घर में दो कमरों में किराए पर रहते थे. डॉ. आदित्य कानपुर के क्राइस्ट चर्च कालेज में फिजिक्स के प्रोफ़ेसर थे और दो कमरों के किराए के रूप में 30 रुपए देते थे.

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद यहां के दो कमरों में 2005 तक यहां रहे है. इसके बाद कभी कभार ही उनका परिवार यहां आता था. किराए के मकान में 12 साल रहने के बाद राम नाथ कोविंद ने कल्याणपुर इलाके में इंद्रानगर के दयानन्द विहार में अपना माकन बनवा लिया और वहां शिफ्ट हो गए.

समय के साथ रामनाथ कोविंद राजनीति और कामकाज में मशगूल होते गए और उन्हें दिल्ली में ही ज्यादा वक्त गुज़ारना पड़ता था लेकिन कानपुर के लोगों के दिलों में उनकी अमिट छाप आज भी देखी जा सकती है. अपनी सादगी के लिए मशहूर रामनाथ कोविद ने अपने कानपुर वाले मकान को बारातशाला के रूप में दान कर दिया था. रामनाथ कोविंद तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं. उनके भतीजे पंकज की झींझक बाजार में एक छोटी सी कपड़े की दुकान है. बड़े भाई प्यारेलाल व स्वर्गीय शिवबालक राम हैं. कोविंद की शादी 30 मई 1974 को सविता कोविंद से हुई थी. इनके एक बेटे प्रशांत हैं और बेटी का नाम स्वाति है.

भूमिहीन रामनाथ कोविंद के पिता ने एक छोटी सी किराना की दुकान से इन्हें पढ़ाया लिखाया. जब ये पांच वर्ष के थे तब इनके घर में आग लग गयी थी, इनकी माँ का देहांत आग में जलने से हो गया था, इनके सभी भाई-बहनों का पालन-पोषण इनके पिता ने किया. कोविंद के परिवार में बाकी लोग सामान्य जीवन ही बिताते हैं. उनके भाई प्यारेलाल बताते हैं, “हम एक सामान्य मध्यमवर्गीय जीवन जीते थे. कोई संकट नहीं था. सभी पांच भाइयों और दो बहनों को शिक्षा मिली. एक भाई मध्य प्रदेश में अकाउंट अफसर के पद से रिटायर हुए हैं. एक और भाई सरकारी स्कूल में टीचर हैं. रामनाथ वकील बन गए. बाकी अपना कारोबार करते हैं.”

कानपुर देहात जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर डेरापुर ब्लॉक से पश्चिम दिशा में परौख गांव में जन्मे रामनाथ कोविंद के बचपन के मित्र जशवंत सिंह (70 वर्ष) खुश होकर बताते हैं, “वो हमेशा बड़ा सोचता था, गाँव के एक प्राइवेट स्कूल में हमने एक से पांचवीं तक पढ़ाई की, छठवीं से आठवीं तक गांव से छह किलोमीटर पैदल खानपुर में पढ़ाई की. बहुत ही साधारण परिवार में जन्म लिया था.” वो आगे बताते हैं, “ये गांव बहुत ही पिछड़ा है पर उन्होंने इस गाँव के लिए सड़क बनवाने से लेकर स्टेट बैंक तक खुलवा दी, गांव में इंटर कालेज भी बनवाया है, जिसमे गांव के हजारों बच्चे पढ़ते हैं.”

फिलहाल, एक परचून की दुकान चलाने वाले का बेटा आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हो रहा है. रामनाथ कोविंद का पूरा परिवार जश्न में डूबा है. अब रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे.

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