आईएएस अनुराग तिवारी की मौत की सीबीआई जांच करवाएगी यूपी सरकार

लाइव सिटीज डेस्क: उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को आईएएस अधिकारी अनुराग तिवारी की संदिग्ध मौत की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की है. गृह विभाग के प्रमुख सचिव ने सोमवार को इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि अनुराग तिवारी की मौत के मामले की जांच को सीबीआई को सौंपा जा रहा है. राज्य सरकार ने तय किया है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की तरफ से मंगलवार को इस संबंध में कार्रवाई की जाएगी.

एफआईआर दर्ज

इससे पहले दिन में यूपी पुलिस ने भादवि की धारा 302 के तहत अज्ञात लोगों पर रहस्यमयी परिस्थितियों में तिवारी की हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है.

अनुराग तिवारी 2007 बैच के कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी थे. उनका शव 17 मई को यूपी की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके के मीराबाई वीआईपी गेस्ट हाउस के बाहर लावारिस हालत में मिला था.

एफआईआर दर्ज करवाने से पहले अनुराग के परिजनों ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की. अनुराग के बड़े भाई मयंक ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करवाई है. मयंक ने बताया कि योगी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि कोई भी अपराधी इस मामले में नहीं बच सकेगा. हालांकि परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन मुख्यमंत्री से इस संबंध में चर्चा करने के बाद इस पर मुहर लग गई.

अनुराग दबाव में थे: परिजन

योगी आदित्यनाथ से मिलने के बाद तिवारी के परिजनों को मुलाकात के लिए एसएसपी लखनऊ दीपक कुमार ने अपने आवास पर बुलाया.

मयंक ने औपचारिक तौर पर हाथ से लिखी हुई शिकायत दीपक कुमार को सौंप दी. शिकायत में कहा गया था कि अनुराग तिवारी का कर्नाटक में दस साल की सेवा के दौरान करीब सात से आठ बार तबादला किया गया.

मयंक ने दावा किया कि उनसे बातचीत में अनुराग ने कई बार कहा कि उन पर उनकी मर्जी के खिलाफ कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. जबकि ​अनुराग पिछले करीब दो महीने से भारी दबाव में चल रहे थे. यह सारी बातें उन्होंने मयंक को बताईं थीं.


धमकी और जान के खतरे की शिकायतों की पुष्टि के लिए मयंक ने पुलिस के सामने सबूत भी पेश किए. मयंक ने उनके और अनुराग के बीच व्हाट्स एप में हुई चैट के स्क्रीनशॉट बतौर सबूत पेश किए हैं. यह चैट बीते 27 से 28 मार्च के बीच हुई है.

पिछले सप्ताह, एक विशेष जांच दल मामले की जांच के लिए गठित किया गया है. इस टीम में एक डीएसपी, चार सब इंस्पेक्टर शामिल हैं. अनुराग के बैच के साथी और लखनऊ विकास प्राधिकरण के उप अधीक्षक पीएन सिंह भी उसी कमरे में ठहरे थे जिसमें अनुराग रूके हुए थे.

अनुराग 14 मई को शहर में मसूरी से आकर रुके थे. वह मसूरी स्थित आईएएस अकादमी में मिड टर्म कोर्स के लिए गए हुए थे. वह मीराबाई गेस्ट हाउस के 19 नंबर कमरे में रुके हुए थे. पीएन सिंह ने उनके नाम से कमरा बुक करवाया था और रात में उनकी मौत से पहले उनके साथ उसी कमरे में रुके थे.

हालांकि लखनऊ पुलिस पहले अनुराग की मौत को हृदयाघात या फिर सामान्य मौत की घटना मानकर चल रही थी. लेकिन बुधवार रात आई पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ने पूरी कहानी का रुख पलटकर रख दिया है. डॉक्टरों ने एस्फिक्सिया को अनुराग की मौत का कारण माना है.

एस्फिक्सिया से मौत सिर्फ उन्हीं परिस्थितियों में होती है जब शरीर को फंदे से लटकाया जाए, डुबाया जाए या फिर किसी तरह से उसे सांस न लेने दी जाए. बहुत ही दुर्लभ परिस्थिति में किसी इंसान की मृत्यु एस्फिक्सिया से दुर्घटनावश हो सकती है.