NEET परीक्षा में लड़कियों की ब्रा तक उतरवाई थी टीचर ने, CBSE ने कर दी कार्रवाई

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लाइव सिटीज डेस्क : कभी—कभी कुछ नियमों का पालन करने के लिए ऐसी नासमझी दिखाई जाती है कि शिक्षा, शिक्षक और शिक्षण संस्थान को भी शर्मसार होना पड़ता है. उत्तर केरल के कन्नूर जिले में एक ऐसी घटना हुई जिसके बाद सभी को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. हुआ यूं कि कन्नूर जिले में एक परीक्षा केंद्र पर NEET की परीक्षा में शामिल हो रही फीमेल कैंडीडेट को ड्रेस कोड का पालन करने के लिए शिक्षकों ने इनरवियर (अंत: वस्त्र) तक उतारने को कह दिया. घटना के बाद केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने चारों शिक्षकों को एक माह के लिए निलंबित कर दिया है.

इन शिक्षकों पर उत्तर केरल के कन्नूर जिले में राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) में शामिल हो रही महिला प्रतिभागियों के अधिकारों के उल्लंघन करने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है. महिला प्रतिभागियों को इन चारों शिक्षकों ने ड्रेस कोड का पालन करने के लिए इनरवियर उतारने को कहा था. सीबीएसई ने इस घटना को लेकर खेद प्रकट करते हुए एक बयान जारी किया है और इस घटना में शामिल चार शिक्षकों को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया.

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बताया जाता है कि जब एक्जाम हॉल में फीमेल कैंडिडेट प्रवेश कर रही थीं उसी वक़्त उनके इनरवियर में लगे मेटल के कारण मेटल डिटेक्टर ने काम करना बंद कर दिया. उसके बाद ही यह दुखद प्रसंग सामने आया. शिक्षकों की ओर से यह सफाई दी गई कि ऐसा बस परीक्षा की शुचिता बरकरार रखने, कदाचार रहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिहाज से किया गया था. बोर्ड द्वारा शारीरिक जांच और सख्त ड्रेस कोड आदि कदाचार मुक्त परीक्षा संपन्न कराने के ही उपाय के रूप में कार्यान्वित किया गया था.

यहां यह गौर करने वाली बात है कि कदाचारमुक्त परीक्षा के नाम पर सिर्फ छात्राओं को ही शर्मसार नहीं होना पड़ा बल्कि छात्र—छात्राओं की कमीज की लंबी आस्तीन को काट दिया गया, क्योंकि ड्रेसकोड में लंबी आस्तीन की कमीज पहनने की अनुमति नहीं थी. कुछ छात्रों ने तो यहां तक कहा कि उनके अभिभावकों को बाजार जाकर उनके लिए नए कपड़े तक खरीदने पड़े. वह भी सिर्फ इसलिए ताकि पहने जाने वाले कपड़े परीक्षा के लिए लागू ड्रेस कोड के अनुरूप हो सके और हमें कोई परेशानी न उठानी पड़े. परीक्षार्थियों को अपने जूते—चप्पल तक उतारने को कहा गया. यहां सवाल उठता है कि कदाचार मुक्त परीक्षा तो अपनी जगह सही है लेकिन उसके नाम पर परीक्षार्थियों के साथ ऐसा अनुचित व्यवहार कहां तक सही कहा जाएगा?

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