‘द वायर’ को जय शाह पर लिखने से रोकने के अदालती आदेश पर विवाद, CPJ ने की आलोचना

लाइव सिटीज डेस्क : पत्रकारों की सुरक्षा के लिए गठित कमिटी CPJ ने भारतीय न्यायपालिका के ‘द वायर’ पर दिए आदेश की निंदा की है. कमिटी के एशिया प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर स्टीवन बटलर ने कहा है कि भारत जैसे लोकतंत्र में ख़बरों या रिपोर्ट्स की पब्लिशिंग संबंधित विवादों में आपराधिक मानहानि के मुक़दमे का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा – द वायर को रिपोर्ट करने से रोकने के बजाय इंडियन ऑथोरिटीज को देश के अप्रासंगिक हो चुके मानहानि कानूनों को ख़त्म करने पर विचार करना चाहिए.

 

बता दें कि गुजरात की एक कोर्ट ने ‘द वायर’ को अमित-जय शाह पर कोई भी स्टोरी छापने से रोक दिया है. जबकि मामले की सुनवाई अभी भी जारी है. 12 अक्टूबर को अहमदाबाद की अदालत ने यह आदेश दिया. अदालत ने यह आदेश जय शाह के व्यापार और सम्मान से जीने के अधिकार की सुरक्षा का तर्क ध्यान में रखते हुए दिया है. ये आदेश जय अमित शाह की उस याचिका के बाद आया है जिसमें उन्होंने वेबसाइट द वायर पर आपराधिक मान हानि का मुकदमा यह कहते हुए दायर किया था कि इस आर्टिकल का मकसद उनके पिता अमित शाह और जय शाह की साख को धूमिल करना है.

इसी क्रम में मंगलवार को कोर्ट ने आपराधिक मानहानि के केस में नामजद ‘द वायर’ के एडिटर सहित उक्त स्टोरी करने वाली रिपोर्टर को सम्मन भी भेजा हैं. उन्हें 13 नवम्बर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है. बता दें कि अगर ये आरोप कोर्ट में साबित हो जाते हैं तो खबर लिखने वाली पत्रकार को 2 साल तक की जेल और जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

जय शाह की तरफ से वकील निरुपम नानावटी के तर्क के आधार पर न्यायालय ने ये आदेश दिया है. निरुपम का तर्क था कि आप किसी के खिलाफ लिखकर या बोलकर कोई बात कहें और बाद में माफी मांग लें. इससे होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है. इसलिए द वायर को तत्काल जय शाह पर स्टोरी लिखने से फैसला आने तक रोका जाना चाहिए. न्यायालय के इस फैसले की अब कड़ी आलोचना भी हो रही है. जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में ट्वीट करके अपना विरोध जताया है.