नौकरी छोड़कर वकील बना था यह आईपीएस, अब करेंगे गुजरात में शराबबंदी का विरोध

लाइव सिटीज डेस्क: करीब ढाई साल पहले भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की नौकरी छोड़ वकालत का पेशा अपनाने वाले राहुल शर्मा अब राजनीति में प्रवेश करने वाले हैं. राहुल ने रविवार को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया है. 1992 बैच के आईपीएस रहे राहुल ने फरवरी 2015 में नौकरी छोड़ वकालत का पेशा अपना लिया था. राहुल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि उनकी राजनीतिक पार्टी का नाम ‘स्मार्ट पार्टी’ होगा. यह दल इस साल के आखिर में होने वाले गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ेगा. दल के गठन की औपचारिकताएं 24 जून तक पूरी होने की उम्मीद है.

बनाएंगे नई राजनीतिक पार्टी

राहुल गोधरा दंगे बाद बनाए गए नानावटी शाह कमिशन के सामने भी पेश हुए थे. उन्होंने राज्य के कुछ अहम लोगों और नेताओं के बीच हुई बातचीत की सीडी कमिशन को सौंपी थी. राहुल ने कहा कि उनकी पार्टी में नए लोग नए आइडिया के साथ सामने आएंगे. उन्होंने कहा, ‘हम गुजरात के लोगों के लिए चांद लाने का वादा नहीं करेंगे, लेकिन अपने किए हुए वादों को पूरा करने की कोशिश की जाएगी.’

शराबबंदी खत्म करने की मांग

उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर प्रचार करने के लिए वह लोगों से चंदा इकट्ठा करेंगे। यह पूछने पर कि प्रचार के दौरान वह कौन सा मुद्दा लोगों के बीच उठाएंगे, राहुल ने कहा, ‘हम लोगों के सामने प्रोहिबिशन पॉलिसी जैसे वास्तविक मुद्दा उठाएंगे.’ उन्होंने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि राज्य की 1,600 किमी लंबे समुद्रतट पर एक भी अच्छा तट नहीं है. राज्य में शराबबंदी के बाद भी शराब आसानी से उपलब्ध है. प्रोहिबिशन पॉलिसी केवल नाम के लिए है. उन्होंने कहा, ‘ अगर शराब पर रोक की नीति पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है तो अच्छा है कि इसे खत्म ही कर दिया जाए.’

दंगों में बचाए थे बच्चे

राहुल गुजरात दंगों के दौरान भावनगर के एसपी के तौर पर तैनात थे. उन्होंने दंगों के दौरान एक मदरसे में करीब 400 बच्चों को बचाया था. बाद में उनका अहमदाबाद सिटी पुलिस कंट्रोल रूम में ट्रांसफर कर दिया गया. उन्हें अहमदाबाद शहर में दंगे की जांच के लिए संयुक्त आयुक्त को मदद करने को कहा गया था.