भारत में बन रही है 12 Km लंबी, कृत्रिम झील के बीचोबीच 182 मीटर ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा

लाइव सिटीज डेस्क : भारत अब पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा कर ही रहेगा. भारत के इंजीनियर अब पूरी दुनिया के इंजीनियरों को टक्कर देने के लिए मैदान में उतर चुके हैं. इन इंजीनियरों के करानामों को देख लोग दांतों तले अंगुलियां दबाने को मजबूर हो रहे हैं. दुबई में बुर्ज खलीफा जैसी इमारत खड़ी होती है तो अमेरिका और यूरोप में भी इंजीनियरिंग के बड़े से बड़े कमाल देखने को मिलते हैं.



लेकिन इस बार भारतीय इंजीनियरों ने भी पूरी दुनिया के सामने अपनी इंजीनियरिंग का लोहा मनवा लिया है. भारत ने कई ऐसे प्रोजेक्ट पूरे किए हैं और कई पर अभी काम चल रहा है, जिन्हें देखकर लोग दंग हो गए हैं. आइए ऐसे एक प्रोजेक्ट पर नजर डालते हैं –

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

भारत के पहले गृहमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी सरदार बल्लभ भाई पटेल के सम्मान में बन रहा यह स्टैच्यू 182 मीटर ऊंचा होगा. 20 हजार स्क्वायर मीटर में फैले इस प्रोजेक्ट के चारों ओर 12 किमी लंबी कृत्रिम झील बनाई जा रही है.

फिलहाल इस प्रोजेक्ट की लागत 2989 करोड़ आंकी गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है और उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले ही इसका खाका तैयार होने लगा था. इस स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी प्रोजेक्‍ट के जरिए देश को ‘एक सूत्र में बांधने’के लिए की गई सांकेतिक पहल थी.

दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा

यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी. 3000 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्‍ट का ठेका लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) कंपनी को दिया गया है. गुजरात के मुख्यमन्त्री रहते हुए नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2013 को सरदार पटेल के जन्मदिवस के मौके पर इस विशालकाय मूर्ति के निर्माण का शिलान्यास किया.

यह स्मारक सरदार सरोवर बांध से 3.2 किमी की दूरी पर साधू बेट नामक स्थान पर है जो कि नर्मदा नदी पर एक टापू है. यह स्थान भारतीय राज्य गुजरात के भरूच के निकट नर्मदा जिले में है.

वर्तमान में विश्व की सबसे ऊंची स्टैच्यू या मूर्ती 152 मीटर की चीन में स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध है. उससे कम दुसरी ऊँची मूर्ति भी तथागत बुद्ध की ही है जिसकी उंचाई 120 मीटर है. बुद्ध की यह मूर्ति सन् 2008 में म्याँमार सरकार ने बनवायी थी. और विश्व की तिसरी सबसे ऊँची मूर्ती भी जापान में भगवान बुद्ध की हैं, इस बुद्ध मुर्ती की ऊंचाई 116 मीटर हैं.