आतंकवादी हमलों के बीच ड्राइवर सलीम शेख चलाता रहा गाड़ी, बचाई श्रद्धालुओं की जान

लाइव सिटीज डेस्क : अमरनाथ के बेगुनाह श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार करने वाले आतंकवादी भी कहने को तो मुसलमान थे, लेकिन इस्लाम और मुसलमान के असल मायने क्या होते हैं, ये पता चला इस आतंकवादी हमले की जगह यानी अनंतनाग से दो हज़ार किलोमीटर दूर गुजरात के वलसाड से आए एक दूसरे मुसलमान की बदौलत.

ये एक इत्तेफ़ाक ही था कि हाथों में बंदूक लिए जो आतंकवादी हिंदू श्रद्धालुओं की बस पर गोलियां चला रहे थे, उस बस को चलाने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक मुसलमान ही था. नाम है सलीम शेख. इस आतंकवादी हमले के दौरान उसने वो काम किया, जो किसी भी इंसान का फर्ज था. उसने खुद अपनी ज़िंदगी की परवाह नहीं की और गोलियों की बौछार के बीच पूरी दिलेरी और जांबाज़ी के साथ अपनी बस चलाता रहा. और तो और हमले के दौरान एक बार फिर बस का टायर पंक्चर हो गया. लेकिन सलीम शेख ने बस नहीं रोकी और करीब डेढ़ किलोमीटर तक तब तक अपनी बस दौड़ाता रहा, जब तक वो आतंकवादियों की पहुंच से बाहर नहीं निकल गई.

अगर ड्राइवर ने सही समय पर बस ना भगाई होती तो इस मरने वालों की संख्या ज्यादा हो सकती थी. सेना के विशेष विमान से सूरत पहुंचे सलीम ने बताया कि ‘आतंकियों ने लगातार फायरिंग की, इसलिए मैं रुका नहीं, लगातार बस चलाता रहा. अल्लाह ने मुझे आगे बढ़ने की हिम्मत दी और मैं वैसा करता गया.’

 

बता दें कि सोमवार रात 8.20 मिनट पर बस पर हमला किया गया, जिसमें 7 लोगों की जान चली गई और पुलिसकर्मियों सहित 19 लोग घायल हुए हैं. जिनमें से चार की हालत नाजुक बताई जा रही है.  गुरुवार दोपहर इन सभी का पार्थिव शरीर एयरफोर्स के स्पेशल प्लेन से सूरत ले जाया गया. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने खुद ड्राइवर सलीम की सराहना की है. मुख्यमंत्री ने सलीम को बहादुरी पुरस्कार के लिए नामित करने की भी बात भी कही. वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार ने सलीम शेख को 3 लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है.

 

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