केपीएस गिल की इस ख्वाहिश को जरूर पूरा करें पीएम मोदी

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लाइव सिटीज डेस्क : बेहद कड़ाई के साथ पंजाब से उग्रवाद का खात्मा करने वाले चर्चित पुलिस अधिकारी केपीएस गिल के निधन के बाद से उनके घर में शोक का माहौल है. केपीएस गिल के निधन की खबर सुनने के बाद से ही उनकी मां डॉ सतवंत कौर के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे. गिल के निधन का उनकी मां को गहरा सदमा पहुंचा है. मां बेटे की याद में इस कदर खो गई हैं कि आंसू उनकी आंखों से रूकने का नाम ही नहीं ले रहे. उनकी मां ने रोते हुए बताया कि वे हमेशा से चाहती थीं कि उन्हें उनके बेटे से पहले मौत आए.

सतवंत कौर की मानें तो उनका बेटा कभी फैसले लेने से डरता नहीं था. इसीका नतीजा है कि आज पंजाब आतंकवाद से मुक्त होकर खुली हवा में सांस ले रहा है. आपको बता दें 82 साल के केपीएस गिल का शुक्रवार को दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया. सतवंत कौर ने ये भी बताया कि देश दुनिया में मशहूर गिल जब रिटायर हुए तो उनके पास कुल जमा डेढ़ लाख रुपये भी नहीं थे. मां को अपनी बेटे की ईमानदारी पर हमेशा फख्र रहा, बस एक ही तमन्ना उनके दिल में हूक बनकर उठती है कि उनका बेटा अगर उनकी अर्थी को कांधा दे पाता.

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गिल की सबसे बड़ी उपलब्धि मई 1988 में उनके नेतृत्व में हुए ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ को माना जाता है. इस अभियान के तहत अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छुपे उग्रवादियों पर कार्रवाई की गयी थी. यह अभियान बेहद सफल रहा था, क्योंकि इस अभियान के दौरान 1984 के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के मुकाबले गुरुद्वारे को बहुत कम नुकसान पहुंचा था. ऑपरेशन ब्लैक थंडर में करीब 67 सिख आतंकवादियों ने आत्मसमर्पण किया था और 43 मारे गये थे.

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चंडीगढ़ स्थित अपने घर में ही रोते हुए भरी आवाज में स्व. गिल की मां ने बताया कि उनका बेटा फैसला लेने में डरता नहीं था. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है. स्व. गिल की मां सतवंत कौर ने बताया कि गुजरात दंगों के बाद हालात काफी नाजुक हो चुके थे. उस समय मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी गिल को अपना सुरक्षा सलाहकार बनाकर गुजरात ले गए. उन्होंने गिल पर भरोसा जता राज्य में शांति बहाली की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी. मां ने बताया कि गिल बताता था कि मोदी कभी उनके फैसले में दखल नहीं देते थे.

‘सुपरकॉप केपीएस गिल की एक ख्वाहिश का पता चला है जिसे पीएम मोदी को पूरा जरुर करना चाहिए. गिल की आखिरी ख्वाहिश थी कि कश्मीर से आतंकवाद खत्म हो जाए. वे चाहते थे कि वे इस मिशन का हिस्सा बने और कश्मीर को आतंकवाद मुक्त बनाए. पंजाब के सीनियर कई अफसरों ने बताया कि अंतिम समय तक गिल हो रहे आतंकी हमलों को लेकर विचलित रहते थे. गिल चाहते थे कि गुजरात की तरह उन्हें कश्मीर में आतंकवाद खत्म करने का मौका मिले, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और यही टीस लेकर गिल दुनिया से चले गए.

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