नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव

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लाइव सिटीज डेस्क : नेपाल की सरकार ने रविवार को प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के खिलाफ महाभियोग का मामला दर्ज करवाया है और इसके साथ ही सुशीला प्रधान न्यायाधीश पद से निलंबित हो गईं. नेपाल की केंद्रीय सत्ता में काबिज नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-माओवादी केंद्र के 249 सांसदों ने कार्की पर विधायिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने और पक्षपातपूर्ण तरीके से फैसले देने का आरोप लगाया है.



सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की पसंद वाले पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को ख़ारिज कर दिया था. इस नियुक्ति के बाद ही मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू हुई है. पिछले महीने अदालत ने सबसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नवराज सिलवाल के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था और कहा था कि उन्हें ग़लत तरीके से दरकिनार कर जय बहादुर चंद नाम के एक कम सीनियर अधिकारी को आगे बढ़ाया गया है. मीडिया के मुताबिक दूसरे उम्मीदवार प्रकाश अर्याल को लेकर मामले की अगली सुनवाई 2 मई को रखी गयी है.

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कार्की अगले महीने सेवानिवृत्त होने वाली थीं. नेपाल के महान्यायवादी रमन श्रेष्ठ ने कहा है कि नेपाल के पुलिस प्रमुख को पदोन्नति देने को लेकर उठे विवाद के दौरान कार्की ने जिस तरह पुलिस महानिरीक्षक उम्मीदवारों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के साथ छेड़छाड़ की,  उनके खिलाफ महाभियोग लगाना जरूरी हो गया था.

कार्की के खिलाफ न्यायालय की पवित्रता और शक्ति संतुलन को भंग करने,  न्यायालय में गुटबाजी और भाई-भतीजावाद करने, निष्पक्ष तरीके से न्याय प्रदान करने में असफल रहने, न्यायालय में और अपने सहकर्मी न्यायाधीशों पर अनुचित दवाब का माहौल बनाने का आरोप भी लगाया गया है.

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