‘जब राम से जुड़ी आस्था पर सवाल नहीं, तो तीन तलाक़ पर क्यों’

लाइव सिटीज डेस्कः ट्रिपल तलाक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रही. देश के बड़े वकीलों ने अपनी दलील कोर्ट से सामने रखी. इस दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर राम का अयोध्या में जन्म होना आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मामला क्यों नहीं?

कपिल सिब्बल ने कोर्ट रूम में कहा कि यह आस्था और विश्वास का मामला है और इसमें कोर्ट को दखल या फैसला नहीं लेना चाहिए. इस पर जस्टिस नरिमन ने पूछा कि क्या उन्हें इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए?

कोर्ट के सवाल पर एआईएमपीएलबी की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा, तीन तलाक सन् 637 से है. इसे गैर-इस्लामी बताने वाले हम कौन होते हैं. मुस्लिम बीते 1400 वर्षों से इसका पालन करते आ रहे हैं. यह आस्था का मामला है. इसलिए इसमें संवैधानिक नैतिकता और समानता का कोई सवाल नहीं उठता.

उन्होंने एक तथ्य का हवाला देते हुए कहा कि तीन तलाक का स्रोत हदीस पाया जा सकता है और यह पैगंबर मोहम्मद के समय के बाद अस्तित्व में आया. मुस्लिम संगठन ने ये दलीलें जिस पीठ के समक्ष दी उसका हिस्सा न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ, न्यायमूर्ति आर.एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर भी हैं.

मालूम हो कि सोमवार को इस मामले में केंद्र सरकार ने तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस प्रथा को अमान्यक घोषित कर देती है तो वह मुस्लिमों के लिए नया कानून लाएगी. केंद्र सरकार की तरफ एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलीलें पेश की थीं.

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