यूपी में अब गैंगस्‍टर और माफिया की खैर नहीं, सरकार ला रही है यूपीकोका

लाइव सिटीज डेस्क : यूपी में गैंगस्‍टर और माफिया की अब खैर नहीं. अपराधियों पर नकेल कसने के लिए सीएम योगी आदित्‍यनाथ सरकार एक कड़ा कानून लेकर आ रही है. यूपी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्‍ट (यूपीकोका) बिल को मंजूरी दे दी है. बता दें कि यूपी सरकार यह एक्ट महाराष्‍ट्र सरकार के मकोका कानून की तर्ज पर लेकर आई है.

यूपीकोका के तहत कोई अगर किसी भी व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो उस मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें बनाई जाएगी. यूपी सरकार इस बिल को विधानसभा में गुरुवार को पेश करेगी. यूपी सरकार के प्रवक्‍ता सिद्धार्थ नाथ ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि यूपीकोका बिल को कैबिनेट में मंजूरी मिल गई है और अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा. उन्‍होंने बताया कि इससे भू-माफिया, खनन माफिया और संगठित अपराध पर रोक लगेगी.



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गौरतलब है कि वर्ष 2007 में बसपा की मायावती सरकार ने यूपीकोका कानून लेकर आना चाहती थी लेकिन उस वक्‍त केन्‍द्र में यूपीए सरकार थी और उसने इस कानून को मंजूरी नहीं दी थी.

कैसे काम करेगा यह कानून
बताया जा रहा है कि इस कानून के तहत कम से कम तीन साल से लेकर उम्रकैद और फांसी की सजा का प्रावधान है. इसके अलावा पांच से 25 लाख तक जुर्माने का प्रावधान करने की तैयारी है. किसी भी व्यक्ति के ऊपर यूपीकोका आईजी और कमिश्नर की परमिशन के बाद ही लगाया जाएगा. इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत भी बनाई जाएगी.

इस कानून के जरिए अपराधियों और नेताओं के नेक्सस पर भी लगाम कसी जाएगी पुलिस और स्पेशल फोर्स को स्पेशल पावर दी जाएंगी. यूपी में इससे पहले संगठित अपराध पर कार्रवाई के लिए स्पेशल टॉस्क फोर्स का गठन हुआ था.

क्या है मकोका
साल 1999 में महाराष्ट्र सरकार ने मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) बनाया था. इसका मुख्य मकसद संगठित और अंडरवर्ल्ड क्राइम को खत्म करना था. 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागू कर दिया. फिलहाल महाराष्ट्र और दिल्ली में यह कानून लागू है. इसके तहत संगठित अपराध जैसे अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपराधी, जबरन वसूली, फिरौती के लिए अपहरण, हत्या या हत्या की कोशिश, धमकी, उगाही सहित ऐसा कोई भी गैरकानूनी काम जिससे बड़े पैमाने पर पैसे बनाए जाते हैं, मामले शामिल है.

सख्त है मकोका कानून
मकोका लगने के बाद आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती है. मकोका के तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का वक्त मिल जाता है, जबकि आईपीसी के प्रावधानों के तहत यह समय सीमा सिर्फ 60 से 90 दिन की है. मकोका के तहत आरोपी की पुलिस रिमांड 30 दिन तक हो सकती है, जबकि आईपीसी के तहत यह अधिकतम 15 दिन की होती है.

इतनी मिलती है सजा
मकोका कानून के तहत अधिकतम सजा फांसी की है. वहीं न्यूनतम पांच साल के जेल की सजा का प्रावधान है.