गुरुवार को ICJ में कुलभूषण जाधव पर आयेगा फैसला

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लाइव सिटीज डेस्क : इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) 18 मई यानी गुरुवार को पाकिस्तान में बंदी कुलभूषण जाधव के मामले पर अपना फैसला सुनाएगा. मामले पर फैसला भारतीय समयानुसार शाम 3:30 बजे सुनाया जाएगा. इससे पहले सोमवार को इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारत और पाकिस्तान ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं. भारत ने कुलभूषण जाधव का बचाव करते हुए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का दोषी बताया तो पड़ोसी देश ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में लाने पर ही सवाल उठाया.

न्यूज़ वेबसाइट NDTV के अनुसार सोमवार को आनेवाले फैसले के 3 संभावित पहलू हो सकते हैं. वो ये कि –

1. ICJ इसे अपने अधिकार क्षेत्र में मानता है या नहीं…

भारत की मज़बूत दलील ये कि काउंसलर एक्सेस न देना वियना संधि का उल्लंघन है, इसलिए ये ICJ के अधिकार क्षेत्र में आता है. पाकिस्तान की दलील कि ये आतंकवाद से जुड़ा और उसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर ख़तरे का मामला है, इसलिए ICJ के दायरे में नहीं आता.

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2. अगर ICJ इसे अपने अधिकार क्षेत्र का मामला मानता है, फिर वह आगे क्या फ़ैसला देता है… 

क्या वह भारत के उन मज़बूत तर्कों को मानेगा है जिसमें..
जाधव को काउंसलर एक्सेस न देना,
उसे क़ानूनी सहायता से वंचित रखना,
ज़बरदस्ती कराए गए कबूलनामे के आधार पर उसे दोषी मानना,
न्याय के सिद्दांतों को ताक पर रख फांसी की सज़ा सुना देना. ये तमाम तर्क शामिल हैं. यह भी देखना होगा कि वह पाक के तर्कों को तवज्जो देता है या नहीं. पाकिस्तान ने भारतीय पासपोर्ट पर जाधव के मुस्लिम नाम को लेकर सवाल उठाए हैं और भारत के दावों को ख़ारिज करने के लिए कई तर्क गढ़े हैं.

3. सबसे बड़ा सवाल…

फ़ैसला भारत के हक़ में आता है तो पाकिस्तान उसे मानेगा या नहीं. पाक की ज़िद को देखकर तो लगता नहीं क‍ि वो मानेगा. अगर ICJ का फ़ैसला वह नहीं मानता है तो फिर आगे क्या? वह दुनिया में अलग-थलग तो दिखेगा पर जाधव की जान बचाने के लिए भारत को और मशक़्क़त करनी होगी. उम्मीद यही की जा सकती है कि फ़ैसला अपने ख़िलाफ़ आने पर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नाराज़गी मोल नहीं लेगा और ICJ के हिसाब से चलेगा.

इससे पहले सोमवार को भारत ने कहा कि कुलभूषण जाधव को फांसी देना मानवाधिकार का उल्लंघन है. साथ ही वियना समझौते का उल्लंघन है. भारत का पक्ष रखते हुए हरीश साल्वे ने इंटरनेशनल कोर्ट के सामने कहा कि मानवाधिकार और अतंराष्ट्रीय कानून के आर्टिकल 36 में कांसुलर एक्सेस (राजनयिक मुलाकात) का अधिकार है, लेकिन कुलभूषण के मामले में इन नियमों का पालन नहीं किया गया. हमारे (भारत) काफी अनुरोध के बाद भी पाकिस्तान की ओर से जाधव से मिलने की इजाजत नहीं दी गई.

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