शादी का रजिस्ट्रेशन हो सकता है जरुरी, नहीं तो लगेगा फाइन!

लाइव सिटीज डेस्क : केंद्र सरकार देश में होनेवाली शादियों के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर सकती है. शादी के एक महीने के अन्दर अगर रजिस्ट्रेशन नहीं हुई तो फिर लेट फीस भी लगेगी. दरअसल, लॉ कमिशन ने शादी रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने के लिए केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी है. इस रिपोर्ट में कमिशन ने कहा है कि तमाम कानून के बावजूद बहु-विवाह, बाल-विवाह जैसी समाजिक बुराइयां मौजूद है ऐसे में शादी के रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता को लेकर विचार किया जाए.

लॉ कमिशन की ओर से सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि तमाम कोशिशों के बावजूद चाइल्ड मैरेज, बहु-विवाह और जेंडर हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयां अभी भी जारी है. कमिशन ने प्रयास किया है कि एक ऑल इंडिया फ्रेमवर्क के तहत सभी तरह की शादियों को रजिस्टर्ड किया जाए चाहे जिस विधि से शादी हुई हो. दुनिया के कई देशों में शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है. भारत में विविधताओं के कारण ऐसा नहीं हो पाया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार लॉ कमिशन के चेयरमैन जस्टिस बीएस चौहान द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट के प्रावधान में शादी के रजिस्ट्रेशन के प्रावधान को शामिल किया जाए. इसके लिए अलग से लॉ की जरूरत नहीं है. बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट के तहत ही कानून में प्रावधान कर शादी का रजिस्ट्रेशन हो और तमाम तरह के परंपरागत शादी, मैरेज ऐक्ट, पर्सनल लॉ आदि के दायरे में होने वाली शादी का रजिस्ट्रेशन किया जाए.

गौरतलब है कि यूपीए 2 के कार्यकाल में राज्यसभा में शादी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता के लिए बिल पास किया गया था लेकिन लोकसभा से बिल पास नहीं हो पाया था और बिल लैप्स कर गया था. यूपीए 2 के समय ही बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट में बदलाव कर शादी रजिस्ट्रेशन के प्रावधान को बिल में लाया गया था. बाद में 2014 में मौजूदा लॉ मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद ने भी शादी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता की वकालत की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में ही विवाह के पंजीकरण को अनिवार्य करने का आदेश दिया था. कुछ राज्य सरकार पहले ही कानून बनाकर अपने यहां विवाह के पंजीकरण को अनिवार्य बना चुके हैं.

पिछले महीने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी सभी धर्म के लोगों के विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का फैसला लिया था.