‘देशद्रोह’ के मामलों में टॉप पर है बिहार, देश में हर हफ्ते हुई एक अरेस्टिंग

sediton

लाइव सिटीज डेस्क : अंग्रेजी में ‘Sedition’ या हिंदी में ‘राजद्रोह’, इसका मुकदमा किसी भी देश में क्रान्ति को दबाने का सबसे कारगर हथियार रहा है. राजद्रोह को सामान्य तौर पर ‘देशद्रोह/राष्ट्रद्रोह’ भी कह दिया जाता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अंग्रेजी में ‘राजद्रोह’ (Sedition) और ‘देशद्रोह’ (Treason) के मायने अलग-अलग हैं. हमारे देश में ‘राजद्रोह’ (Sedition) का कानून 156 साल पुराना है. इस कानून को बनाने वाले अंग्रेजों ने इसे खुद अपने देश में समाप्त कर दिया है. लेकिन भारत में यह अभी भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

यद्यपि इस कानून को बहुत ही गंभीर और असामान्य परिस्थिति में, जैसे भारतीय गणराज्य के विरुद्ध युद्ध छेड़ने जैसी परिस्थितियों में लगाने का विधान है. लेकिन सरकारें इस कानून का इस्तेमाल बौद्धिक बहसों और विद्रोहियों को दबाने के लिए कर रहीं हैं. तमाम अन्य राष्ट्रद्रोह के मामले भी दर्ज किए गए हैं जिनमें लोगों का कसूर सिर्फ यह कहना था कि, ‘पाकिस्तानी हमारे ही जैसे हैं.’

sediton

हावी हैं देशद्रोह के मामले

पूरे देश में पिछले तीन सालों में 165 लोगों को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इस आंकड़े का मतलब यह है कि पूरे देश में हर हफ्ते एक इंसान को गिरफ्तार किया गया है. राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन साल में 105 मामले पूरे भारत में देशद्रोह के आरोप में दर्ज किए गए हैं. 2016 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का आंकड़ा अभी तक उपलब्ध नहीं है. गिरफ्तार किए गए 165 लोगों में से 111 लोग टॉप-4 राज्यों से आते हैं.

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार 111 लोगों में से बिहार में 68, झारखंड में 18, हरियाणा में 15 और पंजाब से 10 लोग हैं. हालांकि बिहार इस लिस्ट में 68 गिरफ्तारियों के साथ टॉप पर है. अधिकतर मामले 2014 और 2015 में दर्ज किए गए हैं. लेकिन 68 में से सिर्फ दो लोगों को ही सजा हुई है. जबकि 53 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है.

India Student Protests

केन्द्र सरकार के अधीन आने वाली दिल्ली ने 2016 में चार लोगों को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था. जबकि 6 लोगों को वामपंथ शासित केरल में गिरफ्तार किया गया है. एक व्यक्ति को कांग्रेस शासित कर्नाटक और एक व्यक्ति को तेलगुदेशम पार्टी शासित आंध्रप्रदेश से गिरफ्तार किया गया है.

आखिर क्या है देशद्रोह

इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 124-A कहती है कि, ‘कोई भी आदमी यदि देश के खिलाफ लिखकर, बोलकर, संकेत देकर या फिर अभिव्यक्ति के जरिये विद्रोह करता है या फिर नफरत फैलाता है या ऐसी कोशिश करता है, तब मामले में आईपीसी की धारा-124 ए के तहत केस बनता है. इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है. वहीं, इस कानून के दायरे में स्वस्थ आलोचना नहीं आती.’

इस धारा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ फैसले सुनाए हैं और उससे साफ होता है कि कोई भी हरकत या सरकार की आलोचनाभर से देशद्रोह का मामला नहीं बनता, बल्कि उस विद्रोह के कारण हिंसा और कानून और व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो जाए तभी देशद्रोह का मामला बनता है.

जम्मू—कश्मीर में दर्ज हुआ है सिर्फ एक मामला

आतंकवाद से बुरी तरह प्रभावित और स्थानीय लोगों के द्वारा आजादी के नारे लगाने के बावजूद जम्मू और कश्मीर में 2015 में राष्ट्रद्रोह का सिर्फ एक मामला ही दर्ज हुआ है. जबकि 2014 और 2016 में कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है.

तस्वीरें विभिन्न स्रोतों से साभार