सीने में दर्द की शिकायत के बाद मशहूर शायर मुनव्वर राणा ICU में भर्ती

लाइव सिटीज डेस्क (विमलेन्दु कुमार सिंह):  गंगा—यमुनी संस्कृति की मिसाल एवं देश में कौमी एकता के सशक्त पैरोकार मशहूर शायर मुनव्वर राणा को सीने में दर्द की शिकायत पर सोमवार को लखनऊ के संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती कराया गया है. सीने में अचानक हुई इस दर्द को डॉक्टर हॉर्ट अटैक बता रहे हैं.

एसजीपीजीआई के सूत्रों ने आज बताया कि राणा को कल रात आईसीयू में भर्ती कराया गया. सीनियर डॉक्टर्स की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है. उनके अचानक अस्पताल में भर्ती होने से कला और संस्कृति जगत में चिंता व्याप्त हो गई है. राणा के परिवार के लोगों का कहना है क‍ि उन्हें लंबे समय से फेफड़े में इन्फेक्शन की भी समस्या थी. जानकारी के अनुसार उन्हें रविवार रात को लखनऊ के डिवाइन अस्पताल ले जाया गया था जहां से उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया. वहां उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है.

राणा कुछ दिन पहले ही दिल्ली के एम्स से इलाज करा के लौटे थे. आपको बता दें कि मुनव्वर राणा को 2015 में गले के कैंसर की समस्या आई थी और इसके कुछ समय पहले ही उनके घुटनों का ऑपरेशन भी हुआ था. चिंता की बात है कि मुनव्वर को डायबिटीज भी है और उनका शुगर लेवल हमेशा असामान्य रहता है. 64 वर्षीय राणा ‘मां’ को लेकर लिखी गई अपनी दिल जीतने वाली शायरी के लिए जाने जाते हैं. मंदिर-मस्जिद जैसे विवादास्पद प्रकरण पर भी खुलकर अपनी राय रख चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने अल्पसंख्यकों के हालात बयान करती और सियासत को आइना बताती गजलें भी खूब कही हैं.

मुनव्वर राणा को 2014 में ही किताब ‘शहदाबा’ के लिए उर्दू के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया था. गौरतलब है कि मोदी के केंद्र में प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में बढ़ रही ‘असहिष्णुता’ के विरोध स्वरूप एवं देश के हालातों से नाराज हो अवार्ड लौटाने वाले लोगों में राणा भी शामिल थे. उनके अवार्ड वापस करने से देश के कला, साहित्य और संस्कृति के गलियारे में भूचाल—सा आ गया था. हालांकि, इसके बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई दिक्कत नहीं है. ‘माँ’ , ‘ग़ज़ल गाँव’, ‘पीपल छाँव’, ‘नीम के फूल’, ‘सब उसके लिए’, ‘मकान’, ‘फिर कबीर’ और ‘नए मौसम के फूल’ मुनव्वर राणा की चुनिंदा रचनाएं हैं.

राणा की शेर ओ शायरी एवं गजलें मुशायरों की किसी भी महफिल की जान हुआ करती हैं.