हरियाणा में 20 पैसा प्रति किलो आलू बेचने को मजबूर है किसान…!

लाइव सिटीज डेस्क: देश में आम मिथक है कि पंजाब और हरियाणा के किसान बेहद सुखी और संपन्न हैं. वहां पर न पानी का संकट है और न ही संसाधनों का. लेकिन जमीनी हकीकत बेहद तल्ख है. सच्चाई यही है कि किसान चाहें मंदसौर का हो या फिर कुरुक्षेत्र का, समस्याएं दोनों के सामने समान हैं. इस साल हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले की पीपली अनाज मण्डी में किसान आलू को महज 20 पैसा प्रति किलो पर बेच रहे हैं. अगर इस भाव पर मजदूरी और ढुलाई को हटा दिया जाए तो किसान की आय महज 9 पैसे प्रति किलो रह जाएगी.


520 का खर्चा, 380 की कमाई

यह सिर्फ किसानों का आरोप नहीं है, बल्कि तथ्य है जिसे हरियाणा सरकार की बाजार समिति भी पुष्ट करती है. एक अंग्रेजी अखबार के दावों की मानें तो बीते 25 मई को हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के मंगोली गांव के रहने वाले किसान सुखपाल सिंह ने 43.20 क्विंटल आलू बेचा था. इस फसल की बिक्री के एवज में उसे महज 900 रुपये मिले हैं. सुखपाल सिंह ने बताया कि उसने मण्डी में आलू की माल ढुलाई और फर्श की सफाई के लिए 520 रुपये चुकाए हैं.

जबकि आढ़तिया ने फसल की कीमत उसे महज 380 रुपये दी है. जिसका मतलब है कि उसकी फसल महज 9 पैसे प्रति किलो के भाव बिक गई है. वहीं आढ़तिया राम कुमार सैनी ने बताया कि सुखपाल के आलू अच्छी क्वालिटी के नहीं थे. हालांकि अच्छी क्वालिटी के आलू का बाजार मूल्य भी 1.5 रुपये प्रति किलो से अधिक नहीं है. इस साल बिहार में आलू की अच्छी फसल होने के कारण वहां से मांग नहीं आई है.


शहर में कैसे बिक रहा 15 रुपये किलो आलू

वहीं कुरुक्षेत्र जिले के ही मामूमजरा गांव के किसान जसबीर सिंह ने भी इस बार अपनी फसल 20 पैसा प्रतिकिलो के भाव पर बेची है. जसबीर कहते हैं कि इस बार बाजार में कोई खरीददार नहीं है. यह नोटबंदी का असर है कि व्यापारियों के पास माल खरीदने के लिए पैसा ही नहीं बचा है. नोटबंदी का आखिरी वार किसानों को ही सहना पड़ रहा है. मैंने 40 एकड़ में आलू की फसल बोई थी. हमें आलू की अगैती फसल भी दिसंबर और जनवरी में 1.5 रुपये किलो के भाव पर बेचनी पड़ी थी. हम मानते हैं कि आलू की फसल पिछली बार की तुलना में इस बार जोरदार है.

लेकिन सरकार हमें फसल बेचने की सुविधा क्यों नहीं उपलब्ध करवाती है? हम फसल को पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में बेचने की व्यवस्था चाहते हैं. इसी गांव के अन्य किसान जोगेंदर सिंह कहते हैं कि किसान आलू को मुफ्त के भाव मण्डी में बेच रहा है. हमें समझ नहीं आता कि आखिर कैसे फेरी वाले और दुकानदार शहरों में आलू को 15 रुपये किलो बेच रहे हैं?


क्या कहते हैं किसान नेता

भारतीय किसान यूनियन की हरियाणा शाखा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चादुनी कहते हैं कि इस साल आलू की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है. आलू की उत्पादन लागत इस साल करीब 7 रुपये प्रति किलो है. शुक्रवार को किसानों ने अपनी फसल के उचित मूल्य की मांग को लेकर हाइवे भी जाम किया था.