जिस पीएचडी छात्र को आतंकी बता 16 साल जेल में रखा, वो निकला बेगुनाह

लाइव सिटीज डेस्क : 14 अगस्त 2000 का दिन था. जब साबरमती एक्सप्रेस फैजाबाद से लखनऊ जा रही थी. तभी ट्रेन में ब्लास्ट किया जाता है. 11 लोग मारे जाते हैं. इस घटना के 16 साल से अधिक हो गए हैं. इस घटना के बाद जम्मू कश्मीर के बारामूला जिले के रहने वाले वानी को संदिग्ध आतंकी बता  व इस मामले में आरोपी बना कर  2001 में गिरफ्तार किया गया था. जिन पर कुल 11 मामले दर्ज किये गए. लेकिन साक्ष्य के आभाव में कोर्ट ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया है. जब वो गिरफ्तार हुए थे तो उनकी उम्र महज 28 साल की थी और वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के होनहार छात्र थे. वानी अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से पीएचडी  कर  रहे थे.

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ट्रेन धमाकों के केस में वर्ष 2001 में गिरफ्तार किए गए गुलजार अहमद वानी को अपनी जवानी के 16 साल जेल में बिताने के बाद कोर्ट ने निर्दोष बताकर सभी 11 केसों में बरी कर दिया. ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में वानी को एक के बाद एक सभी 11 मामलों में बरी कर दिया.

बता दें कि वानी पर हिजबुल मुजाहिद्दीन का आतंकी होने के आरोप लगे थे. इस मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वानी के 16 साल के ट्रायल पर अप्रसन्नता जाहिर की थी और आदेश दिए थे कि अगर कोर्ट विटनेस एक्जामिनेशन पूरा नहीं कर पाता तो उसे नवंबर महीने में बेल मिल जानी चाहिए.

दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस पुख्ता सबूत पेश नहीं किये जाने के कारण बाराबंकी कोर्ट ने वानी को रिहा कर दिया.बाराबंकी की कोर्ट ने वानी को अंतिम बचे हुए साबरमती एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में भी सबूतों के अभाव में बरी कर दिया. 

44 वर्षीय वानी को अंतत: जमानत मिल तो गई, लेकिन इसकी कीमत उन्हें जिंदगी के 16 साल जेल में काटकर चुकानी पड़ी.  वानी के वकील ने कोर्ट में कहा, ‘वानी के जेल में बिताए 16 सालों का हिसाब कौन चुकाएगा? क्या सरकार उन पुलिस अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करेगी जिन्होंने 11 केसों में वानी को आरोपी बनाया? उसके परिवार की मदद कौन करेगा?’

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