PM से बोले अन्ना – जो करना चाहिए वो आप नहीं कर रहे, जो नहीं करना चाहिए तुरंत कर दे रहे हैं

anna
सत्याग्रह पर बैठे अन्ना हजारे

नई दिल्ली : साल 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल की मांग को लेकर चर्चा में आये अन्ना हजारे आज 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन फिर सत्याग्रह पर हैं. आज गांधी जयंती के अवसर पर अन्ना हजारे दिल्ली के राजघाट पर सत्याग्रह कर रहे हैं. बहुत दिनों बाद फिर से सक्रिय हुए अन्ना का कहना है कि तीन साल बाद भी केंद्र की मोदी सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए, जिसकी वजह से वह दुखी हैं.

इतना ही नहीं, अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कई बातें भी कही हैं. अन्ना ने प्रधानमंत्री को उनके वादे याद दिलाए हैं. नीचे पढ़िए अन्ना की पीएम को लिखी गई चिट्ठी –

मा. नरेंद्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री, भारत सरकार,
रायसीना हिल, नई दिल्ली-110 011

विषय- बढ़ते हुए भ्रष्टाचार तथा लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून पर अमल ना होने के कारण व्यथित होकर व्यक्तिगत सत्याग्रह करने हेतु…

महोदय, आज 2 अक्टूबर यानी महात्मा गांधीजी की जयंती के अवसर पर आत्म चिंतन करते हुए मन ही मन बड़ा दुख हो रहा है.

भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए देश में लोकपाल और राज्यो में लोकायुक्त आएगा. नागरिकों की सनद पर अमल होगा. विदेश में छुपाया हुआ कालाधन 30 दिन में वापस आएगा. नोटबंदी से देश में छुपाया हुआ कालाधन खत्म होगा. किसानों की आत्महत्या रुकेगी. किसानों के के उपज को पैदावारी के मूल्य पर आधारित सही दाम मिलेगा. स्वामिनाथन आयोग की रिपोर्ट पर अमल होगा. महिलाओं को पुख्ता सुरक्षा और सम्मान मिलेगा. देश में सभी स्तरों के लोगों के समस्याओं पर सही हल निकलेगा और देश में अच्छे दिन आएंगे…. आपकी सरकार की ऐसी कितनी बातों पर देश की जनता आशा लगा कर बैठी हैं लेकिन आज तीन साल बाद वर्तमान स्थिति क्या है?

ना लोकपाल-लोकायुक्त नियुक्त किया गया है और न नागरिक संहिता पर अमल हुआ हैं. ना विदेश का कालाधन वापस आया है, न नोटबंदी से देश में छुपाए काले धन का जनता को हिसाब मिला है. किसानों की आत्महत्या रुकी नहीं है बल्की बढती जा रही है. स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट कुछ कर नही रही है. न उनकी उपज को पैदावारी के आधार पर दाम मिला है और न देश की नारी को सुरक्षा एवं सम्मान मिला हैं. ऐसा दिन नहीं जाता कि महिला पर अन्याय नहीं हुआ. भ्रष्टाचार तो दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. फोर्ब्स की रिपोर्ट से पता चला कि वर्तमान स्थिति में एशिया स्थित सभी देशों में भ्रष्टाचार को लेकर भारत पहले स्थान पर है. ट्रान्फरन्सी इंटरनैशनल की रिपोर्ट के अनुसार पता चलता है कि भारत में भ्रष्टाचार की स्थिति काफी खराब है. इससे और दुर्भाग्यपूर्ण बात क्या हो सकती है?

देश की इस वर्तमान स्थिति को देखते हुए सवाल पैदा होता है कि क्या महात्मा गांधीजी, सरदार वल्लभभाई पटेल, शहीद भगत सिंग सहित लाखों देशभक्तों ने स्वतंत्र भारत का सपना इसलिए देखा था? क्या इसलिए लाखों देशभक्तो ने देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी? आजादी के 70 साल बाद भी अगर देश में सही लोकतंत्र प्रस्थापित नहीं होता, जनता को सही आजादी का अनुभव नहीं मिलता तो फिर सवाल पैदा होता है कि क्या हमारे स्वातंत्र्यवीरों की कुर्बानी व्यर्थ गई?

2011 से 2013 तक देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा जन आंदोलन हुआ जिसके कारण और जन भावना को देखते हुए संसद में लोकपाल और लोकायुक्त कानून पारित करना पडा. जब देश की जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ महात्मा गांधीजी ने दिखाए हुए शांतिपूर्ण मार्ग से रास्ते पर उतर आई थी, उसी समय आपने चुनाव प्रचार दौरान जनता को भ्रष्टाचार मुक्त भारत और अच्छे दिन के सपने दिखाए. भ्रष्टाचार से पीड़ित जनता ने आप की बड़ी बड़ी बातों पर भरोसा किया और आपकी सरकार सत्ता में आ गई. इस बात को तो आप भी मानते होंगे कि केवल भ्रष्टाचार को मिटाने और विकास के मुद्दे पर जनता ने आपकी सरकार चुनी है. अब तीन सालों से अधिक समय बीत चुका है लेकिन देश में भ्रष्टाचार बिलकूल कम नहीं हुआ है बल्की बढ़ता जा रहा है. क्योंकि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आपकी सरकार ने बड़ी-बड़ी बातों के सिवा कुछ भी नहीं किया है तो कैसे बनेगा भ्रष्टाचार मुक्त भारत? इसलिए आज मन बहुत दुखी हो रहा है.

लोकपाल आंदोलन के दौरान 28 अगस्त 2011 को संसद के दोनो सदनों ने मिलकर एक मत से एक रेजॉल्यूशन पारित किया था. उसके तहत प्रधानमंत्री ने नागरिक संहिता, निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के अधीन करना और हर राज्य में लोकायुक्त लागू करना, इन मुद्दों पर सख्त कानून बनवाने के बारे में जनता को लिखित आश्वासन दिया था. उस वक्त आपकी पार्टी भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आंदोलन को पुरा समर्थन दे रही थी. संसद में बीजेपी नेता मा. अरुण जेटली जी और मा. सुषमा स्वराज जी ने लोकपाल-लोकायुक्त कानून का पुरा समर्थन किया था. इसलिए सत्ता में आने के बाद आपकी सरकार से जनता को यह उम्मीद थी कि आप तुरन्त लोकपाल और लोकायुक्त कानून पर अमल करेंगे. मैंने भी आपको तीन साल लगातार याद दिलाते हुए पत्र लिखे लेकिन तीन साल में आपने कुछ नहीं किया. ना ही किसी पत्र का जबाब दिया.

दुख की बात यह है कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए जो करना चाहिए वह आप नहीं कर रहे हैं और जो नहीं करना चाहिए वह आप अतिशीघ्र कर रहे हैं. इसके बारे में कुछ उदाहरण आपके सामने रख रहा हूं –

1 . 18 दिसंबर 2014 को आपकी सरकार ने लोकपाल और लोकायुक्त संशोधन बिल संसद में पेश किया था. उसमें खासकर के लोकपाल चयन कमिटी में नेता विपक्ष मौजुद ना हो तो उनकी जगह पर सबसे बड़े राजनैतिक दल का नेता की स्थापना करने का प्रावधान रखा गया है. साथ ही लोकपाल का मुख्यालय, सीवीसी, सीबीआई और अधिकारियों का स्तर और धारा 44 में लोकपाल के दायरे में रखे गए अधिकारियों तथा कर्मचारियों की संपत्ति घोषित करने के बारे में प्रावधान हैं. यह बिल स्थायी कमिटी के पास भेजा गया था. स्थायी कमिटी ने कुछ अच्छे सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है लेकिन पता चलता है कि यह बिल अकारण सात सदस्यों के मंत्रीगण के पास भेजा गया है और वह अब तक प्रतीक्षित है. समझ में नहीं आ रहा है कि स्थायी समिति का स्थान मंत्रीगण से उपर होते हुए भी स्थायी समिती की रिपोर्ट आने के बाद इस बिल को मंत्रिगण के पास भेजने की जरूरत नहीं थी, कारण स्थायी समिति की रिपोर्ट आ गई थी.

2 . 27 जुलाई 2016 को आप लोकपाल और लोकायुक्त कानून की धारा 44 में संशोधन लाए. लोकपाल और लोकायुक्त कानून 2013 के तहत लोकपाल के दायरे में जो भी अधिकारी एवं कर्मचारी हैं उन्हें अपनी और अपने परिवार के नाम पर की गई संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया था. लेकिन आपकी सरकार ने इसमें संशोधन कर के अधिकारियों के परिवारिक सदस्यों के नाम पर की गई संपत्ति की जानकारी देने का प्रावधान हटा दिया है. चौकाने वाली बात यह है कि आपने यह संशोधन 27 जुलाई 2016 को लोकसभा में रखा. कोई बहस नहीं होने दी. ना लोकसभा को पहले जानकारी दी गई थी. केवल ध्वनि मत से यह बिल एक ही दिन में और जल्दबाजी में पारित किया गया. दुसरे दिन 28 जुलाई 2017 को भी राज्यसभा इसी प्रकार वह पारित किया गया और तिसरे दिन यानी 29 जुलाई 2016 को महामहिम राष्ट्रपतीजी के हस्ताक्षर लेकर बिल पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू कर दिया गया. पता नहीं ऐसी क्या आपातकालीन स्थिति पैदा हुई थी कि आपने केवल तीन दिन में धारा 44 के संशोधन को पारित कर लिया?

दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि धारा 44 का संशोधन तीन दिन में पारित हो सकता है लेकिन लोकपाल की नियुक्ति तीन साल में नहीं हो सकती! धारा 44 के संशोधन को शीघ्र पारित करके आपने अधिकारियों के पारिवारिक सदस्यों के नाम पर की गई संपत्ति छुपाना आसान कर दिया है. आपने सत्ता में आने से पहले और बाद में भी कई बार पारदर्शिता की बात कही है लेकिन धारा 44 के संशोधन को देखते हुए पारदर्शिता कैसे स्थापित होगी, यह समझ में नहीं आ रहा है. इसलिए हमारा मानना है कि आपकी सरकार ने धारा 44 में संशोधन करके लोकपाल और लोकायुक्त कानून को कमजोर किया है.

आपकी सरकार ने ‘वित्त विधेयक 2017’ को धन विधेयक में शामिल कर के जल्दबाजी से पारित कर लिया. इसमें कम्पनियों द्वारा राजनैतिक दलों को दिए जाने वाले चंदे की 7.5 प्रतिशत की मर्यादा हटा कर राजनैतिक दलों को आर्थिक तौर पर मजबूत करने का रास्ता खुला कर दिया. आप इस विधेयक में 40 संशोधन लाकर पारित कर सकते हैं लेकिन लोकपाल कानून लागू करने के लिए तीन साल में एक संशोधन पारित नहीं कर सकते.

पहली बार संसद में कदम रखते समय संसद की पहली सीढ़ी पर आपने माथा टेका था और देशवासियों को कहा था कि मैं आज लोकतंत्र के पवित्र मंदिर में जा रहा हूं. मैं इस मंदिर की पवित्रता बनाए रखने की कोशिश करूंगा लेकीन आपने लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर में जाने के बाद जो करना चाहिए था, वह नहीं किया और जो करना नहीं चाहिए था, वह शीघ्र कर दिया. क्या इससे लोकतंत्र के पवित्र मंदिर की पवित्रता भंग नहीं हुई है?

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