पांच जजों की संविधान बेंच आज करेगी अयोध्या मामले पर सुनवाई

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फाइल फोटो

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: आज देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुनवाई होनी है. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हीं पांच सदस्यीय संविधान बेंच का गठन किया है जो इस पूरे मामले की सुनवाई करेगी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच में उनके आलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं.

पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा ने इस मामले को पांच जजों की बेंच को भेजने से मना कर दिया था

आपको बता दें कि इससे पूर्व इसी मामले को लेकर पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा ने इस पूरे मामले को पांच जजों की बेंच को भेजने से मना कर दिया था. लेकिन उनके उस फैसले ​के विपरीत इस पूरे मामले को पांच सदस्यीय बेंच के पास भेजा गया है. बता दें कि मुस्लिम पक्षकारों ने इस मामले को पांच सदस्यीय संविधान बेंच के पास भेजने का स्वागत किया है.



इससे पहले चार जनवरी को मामले की सुनवाई हुई थी. इस दौरान शीर्ष अदालत ने यह बात साफ कर दी थी मामले की सुनवाई के लिए गठित होने वाली उचित बेंच 10 जनवरी को अगला आदेश देगी. ऐसे में आज गुरुवार के दिन सुनवाई में ये तय होगा कि मामले की नियमित सुनवाई कब से शुरू होगी और क्या ये रोजाना होगी. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, सुबह 10:30 बजे मामले की सुनवाई होनी है.

दरअसल, अयोध्या मामले में पांच सदस्यीय बेंच का गठन भी बहस का मुद्दा बन गया है. सुप्रीम कोर्ट को  चीफ जस्टिस को संविधान पीठ के गठन का अधिकार है. अगर चीफ जस्टिस को लगता है कि इसमें कानूनी सवाल है, तो वह ऐसा कर सकते हैं. ऐसा पहले भी हुआ है. वहीं, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल व वरिष्ठ वकील विकास सिंह का कहना है कि जब तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया था तो प्रशासनिक स्तर पर इसे पांच सदस्यीय पीठ के पास नहीं भेजा जा सकता. यह गैरकानूनी है.

गौरतलब है कि अयोध्या में भूमि विवाद से संबंधित 2.77 एकड़ जमीन के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 सितंबर, 2010 के 2:1 के बहुमत के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 अपीलें दायर की गई हैं. हाईकोर्ट ने इस फैसले में विवादित भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था. इस फैसले के खिलाफ अपील दायर होने पर शीर्ष अदालत ने मई 2011 में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के साथ ही विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था.