गोरखपुर दंगा : सीएम आदित्यनाथ को यूपी सरकार ने दिया ‘क्लीन चिट’

adityanath-gorakhpur-pti

लाइव सिटीज डेस्क : सीबीआई की दिल्ली स्थित फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट के आधार पर यूपी सरकार ने राज्य की सीबी-सीआईडी विंग को राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने से मना कर दिया है. यह मामला गोरखपुर में साल 2007 में हुए दंगों के दौरान योगी आदित्यनाथ द्वारा कथित नफरत भरे भाषण देने से जुड़ा हुआ है.

यूपी के मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट को बताया कि गृह विभाग के प्रमुख सचिव देवाशीष पंडा ने यह इजाजत देने से पिछले सप्ताह इनकार कर दिया था. इस मामले में आदित्यनाथ के कथित भाषण की वीडियो रिकॉर्डिंग ही मुख्य सबूत था.

भटनागर ने कहा, ‘सीबीआई की फॉरेंसिक लैब ने जो रिपोर्ट दी है उसमें यह साफ कहा गया है कि सीडी के साथ छेड़छाड़ की गई है. पूरा मामला उसी सीडी पर आधारित था और उसी सीडी को टेंपर्ड पाया गया है. यही बात हमने आज कोर्ट को बताई है.’ यह घटनाक्रम आदित्यनाथ के लिए बहुत राहत वाला है.

adityanath-gorakhpur-pti

आदित्यनाथ एक बार संसद में यह कहते हुए रो पड़े थे कि गोरखपुर में साल 2007 में दंगा भड़काने का गलत आरोप उन पर लगाया गया है. इंडियन पैनल कोड के सेक्शन 153ए के तहत दर्ज की गई हेट स्पीच के इस मामले में सुनवाई राज्य सरकार से मुकदमे की मंजूरी मिलने पर ही हो सकती थी.

2007 के दंगों के पीड़ित परवेज परवाज ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से गुहार लगाई थी और शिकायत की थी कि इस मामले में मुकदमे की इजाजत देने में बहुत देर की जा रही है. परवाज ने कहा था कि एफआईआर में उन्होंने जिसे आरोपी बनाया था, वह अब प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके हैं.

gorakhpur_up_violence
फोटो : IBN

सीबी-सीआईडी ने मामले की जांच का काम साल 2013 में अपने हाथ में लिया था. उसने जांच साल 2015 में पूरी की और आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाने की इजाजत मांगी थी. परवाज की एफआईआर अदालत के दखल देने के बाद साल 2008 में दर्ज की जा सकी थी. उत्तर प्रदेश में इससे पहले की अखिलेश यादव सरकार ने मुकदमे की मंजूरी देने के बारे में कोई निर्णय नहीं किया था.

इस साल 28 अप्रैल तक इस मामले में निर्णय लंबित था, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की थी और इस मुद्दे पर यूपी सरकार का रुख जानना चाहा था. कोर्ट ने तब यह कहते हुए चिंता जताई थी कि कथित घटना साल 2007 की है, जब गोरखपुर में सांप्रदायिक दंगा भड़का था, जिसमें कई लोगों की जान गई थी.

कोर्ट ने कहा था कि यह ‘समाज के खिलाफ अपराध था और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर एक्शन लिया जाना चाहिए.’

allahabad-court
फाइल फोटो

बताते चलें कि जनवरी 2007 में गोरखपुर में दंगा भड़का था. आरोप है कि तत्कालीन सांसद आदित्यनाथ ने दो समुदायों के लोगों के बीच टकराव में युवक की मौत होने के बाद कथित हेट स्पीच दी थी, उसके बाद दंगे को हवा मिली थी. योगी को तब अरेस्ट किया गया था और 10 दिनों तक जेल में रखा गया था. कोर्ट से जमानत मिलने पर वह बाहर आए थे.

यह भी पढ़ें :
वायरल फोटो : क्या कपिल मिश्रा-मनोज तिवारी ने मिलकर रची साजिश?
‘ट्रिपल तलाक’ को SC ने बताया शादी खत्म करने का सबसे घटिया तरीका
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा : बंद शराब कंपनी के कर्मियों के लिए क्या है राहत पैकेज
पटना में पूर्व मंत्री की पत्नी चेन स्नेचिंग की शिकार, CCTV में तस्वीरें कैद